कैप्टन वरुण सिंह की हालत अब भी नाजुक, पिता बोले “मेरा बेटा एक योद्धा है वह जंग जीतकर लौटेगा”

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डेस्क : कुन्नूर हेलीकॉप्टर क्रैश में सिर्फ एयरफोर्स अधिकारी ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ही बचे हैं, बता दें कि वह बेंगलुरु में अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। हादसे में 45 परसेंट बर्न इंजरी के साथ उनका इलाज चल रहा है। उनको इमरजेंसी इलाज के लिए आर्मी हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया है। इस वक्त इंटरनेट पर उनके द्वारा लिखा गया एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है।

यदि ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह की बात की जाए तो उनकी हालत अभी स्थिर बनी हुई है। इस वक्त उनको बेंगलुरु के कमांड हॉस्पिटल में रखा गया है, जहां पर उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है बतादें की वरुण सिंह के माता-पिता भी अस्पताल में पहुंच गए हैं। ऐसे में जब पत्रकारों ने उनके माता-पिता से बात की तो उनके पिताजी रिटायर्ड कर्नल के पी सिंह का कहना है कि उसकी हालत के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन मेरा बेटा एक योद्धा है और वह इस लड़ाई को जीत कर ही आएगा।

इस वक्त उनके इलाज में देश के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर लगे हुए हैं। कई लोग उनके माता-पिता से मिलने आ रहे हैं। सभी लोग उनके माता-पिता का ढांढस बंधाते हुए दिख रहे हैं, बताते चलें कि तमिल नाडु हेलीकॉप्टर क्रैश में 13 लोगों की जान चली गई थी जिसमें भारत के पहले सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के साथ 11 सैन्य बल के अधिकारी भी यह दुनिया छोड़कर चले गए। ऐसे में उनके घर का माहौल गमगीन है और पूरा देश इस वक्त ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह की हालत को लेकर चिंता में बना हुआ है सभी उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं।

उन्होंने आर्मी स्कूल के बच्चों एवं टीचरों के लिए एक पत्र लिखा था। उन्होंने अपने पत्र के माध्यम से बताया था कि कोई भी बच्चा 90% अंक नहीं ला सकता। ऐसे में औसत दर्जे का विद्यार्थी होना भी एक उपलब्धि है। इसके बाद उन्होंने बताया कि जरूरी नहीं है आप औसत है तो कुछ कर नहीं सकते।

आप अपने जीवन में अन्य चीजें जैसे संगीत, कला, साहित्य, ग्राफिक डिजाइन इत्यादि में पारंगत हो सकते हैं और आप लगातार अपने काम को करते रहे। ऐसे में आप उस काम में सर्वश्रेष्ठ हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि पहले मैं एक आम बच्चा था जिसमें विश्वास की काफी कमी थी लेकिन जब मैं एक लड़ाकू स्क्वाड्रन बना तो मैंने दिन-रात दिमाग और दिल लगाकर काम किया और आज में सर्वश्रेष्ठ काम कर रहा हूं।

उन्होंने अपने इस पत्र का पूरा श्रेया स्कूल को दे दिया। ऐसे में सभी इस पत्र को पढ़कर उनकी सराहना कर रहे हैं।

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