“बेटी बचाओ, बेटी पढाओ” योजना का 80% राशि सरकार विज्ञापनों पर लुटा दिया!

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डेस्क : केंद्र की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत राज्यों को दिए गए कुल फंड का करीब 80 प्रतिशत विज्ञापन के लिए इस्तेमाल किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना 2014–15 में शुरू की गई थी। पांच वर्षों में योजना के क्रियान्वयन पर 848 करोड़ रुपये के बजट में से केवल 157 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गुरुवार को संसद में पेश की गई रिपोर्ट में पैनल ने यह जानकारी दी है। बता दें कि पैनल का नेतृत्व महाराष्ट्र भाजपा की लोकसभा सांसद हीना विजयकुमार गावित कर रही हैं।

पैनल ने गुरुवार को कहा कि इस योजना के लिए पांच वर्षों में आवंटित 848 करोड़ रुपये में से 623 करोड़ रुपये राज्यों को जारी किए गए हैं। पैनल ने उल्लेख किया कि 2016 और 2019 के बीच राज्यों को दिए गए 447 करोड़ रुपये में से, “केवल मीडिया प्रचार पर करीब 80% राशि खर्च किया गया था”। पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि समिति बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश को लोगों के बीच फैलाने के लिए मीडिया अभियान चलाने की आवश्यकता को समझती है, लेकिन उन्हें लगता है कि योजना के उद्देश्यों को संतुलित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पैनल ने यह भी कहा कि महिला और बाल विकास मंत्रालय, जो कि योजना की देखभाल करने वाली संस्थाओं में से एक है, राज्य के पास धन लंबित होने के बावजूद अतिरिक्त धन जारी कर रहा है। पैनल ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि योजना के लिए धन का सही उपयोग किया जाए। रिपोर्ट में कहा गया है, “सरकार को… शिक्षा और स्वास्थ्य में क्षेत्रीय हस्तक्षेप के लिए नियोजित व्यय आवंटन पर ध्यान देना चाहिए।”

2014–15 में शुरू किए गए केंद्र की महत्वपूर्ण योजना “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का उद्देश्य भारत में लड़कियों के बेहतर शिक्षा और दक्षता में सुधार करना है।बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना से पूरे जीवन-काल में शिशु लिंग अनुपात में कमी को रोकने में मदद मिलती है और महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों का समाधान होता है। यह योजना तीन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित की जा रही है अर्थात महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन मंत्रालय।बुनियादी स्तर पर लोगों को प्रशिक्षण देकर, संवेदनशील और जागरूक बनाकर तथा सामुदायिक एकजुटता के माध्यम से उनकी सोच को बदलने पर जोर दिया जा रहा है। एनडीए सरकार कन्या शिशु के प्रति समाज के नजरिए में परिवर्तनकारी बदलाव लाने का प्रयास कर रही है।

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