ये है CDS बिपिन रावत का पुश्तैनी गांव, जहां इनके परिवार के अलावा और कोई नहीं रहता..वीरान पड़ा है गांव..

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डेस्क : देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत इस दुनिया को अलविदा कह चुके है, बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में उनकी, पत्नी मधुलिका रावत समेत 11 अन्य अफसरों और सहयोगियों के साथ मौत हो गई। लेकिन इसी बीच आज आप लोगों को दिवंगत बिपिन रावत का पुश्तैनी घर के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां, इस गांव में अब केवल CDS जनरल रावत के ही परिवार (FAMILY) के कुछ लोग रहते हैं।

जानकारी के मुताबिक, जनरल रावत अपने रिटायरमेंट के बाद उत्तराखंड में ही बसना चाहते थे और वह यह भी चाहते थे कि रिटायरमेंट के बाद अपने गांव की तस्वीर बदलेंगे। लेकिन, अचानक एक दुर्घटना में जान गंवाने के चलते उनके सपने अधूरे ही रह गए, देखिए जनरल रावत के घर की तस्वीरें क्या दास्तान बयान कर रही है।

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले के सैन नाम के इस गांव में कभी 15 से ज्यादा परिवार रहते थे, यह कुछ ही साल पहले की बात है, इससे पहले 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां करीब 93 लोगों की आबादी थी, लेकिन अब यहां सिर्फ जनरल रावत का परिवार ही शेष है। अब आप लोग के मन में ये सवाल उठ रहा होगा आखिर इस गांव में रहने वाले परिवारों का क्या हुआ? मूलभूत सुविधाओं की कमी के चलते यहां से लोग पलायन करने पर मजबूर हुए, अब सैन गांव में केवल जनरल रावत के चाचा रहते हैं।

वही दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत के चाचा भरत सिंह रावत का कहना है कि उन्हें साल 2018 में उनके भतीजे ने उम्मीद दिलाई थी कि वो रिटायरमेंट के बाद गांव की तस्वीर बदलेंगे, यहां तमाम सुविधाएं लेकर आएंगे और एक घर बना कर यहां रहेंगे भी, यही नहीं, जनरल रावत के इरादे और भी बहुत कुछ थे। बिपिन रावत यहां अन्य लोगों का रिवर्स पलायन करवाने का इरादा भी रखते थे, उनका कहना था कि गांव में आने जाने के लिए अच्छी सड़क हो, उच्च शिक्षा के लिए सुविधाएं अच्छी हों, इंजीनियरिंग कॉलेज हो, स्वास्थ्य सेवा बेहतर हों ताकि यहां से पलायन न हो।

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