सीडीएस बिपिन रावत अपने पीछे छोड़ गए दो बेटियां, एक झटके में बच्चों के सिर से उठा मां-बाप का साया

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डेस्क : भारतीय वायुसेना के ट्विटर हैंडल से आज दुखद खबर दी गई कि सीडीएस बिपिन रावत (CDS General Bipin Rawat) अब इस दुनिया में नहीं रहे। बता दें कि वह तमिलनाडु के कुन्नूर जिले से जब आईएएफ के हेलीकॉप्टर से आ रहे थे तो उनका हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में करीब 14 लोग मौजूद थे जिसमें से 13 लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

(फाइल फोटो- पत्नी मधुलिका के साथ CDS जनरल बिपिन रावत)

इस दुर्घटना में विपिन रावत की पत्नी मधुलिका रावत (Madhulika Rawat) भी मौजूद थी। इस वक्त पूरा देश शोक के लहर में डूबा हुआ है बता दें कि बिपिन रावत देश में गठित की गई पहली सी डी एस के पद पर तैनात थे। बॉलीवुड जगत की सभी हस्तियां और राजनीति से जुड़े लोग इस वक्त इंटरनेट के माध्यम से विपिन रावत को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

बता दें कि बिपिन रावत का जन्म पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उनके परिवार की कई पीढ़ियां भारतीय सेना में अपनी सेवा दे चुकी हैं। बिपिन रावत ने सैंट एडवर्ड स्कूल शिमला से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वे नेशनल डिफेंस अकैडमी खड़कवासला मे रहे। इतना ही नहीं उन्होंने बेहद कम उम्र में भारतीय सेना ज्वाइन कर ली थी। वह देहरादून के 11वी गोरखा राइफल्स की पांचवी बटालियन में शामिल हुए थे।

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बिपिन रावत ने ऊंची पहाड़ियां को पता कर, उन पर युद्ध करने का अच्छा ख़ासा अनुभव था। इसके लिए उनको परम सेवा मेडल भी दिया जा चुका है। इतना ही नहीं उनके पास भारतीय सेना से जुड़े कई मेडल थे फिलहाल के लिए बता दें कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं और उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जाएगा। ऐसे में विपिन रावत की दो बेटियां हैं दोनों बेटियां इस वक्त अपने मां-बाप को खो चुकी हैं।

बड़ी बेटी का नाम कीर्तिका रावत (Kritika Rawat) है और छोटी वाली का नाम तारिणी (Tarini) है। अब मां-बाप को कंधा देने की जिम्मेदारी दोनों बेटियों के कंधे पर आ गई है ज्यादा जानकारी के लिए बता दें कि कृतिका मुंबई में रहती है और तारिणी दिल्ली में रहती हैं। तारीणी दिल्ली में ही रहकर दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं।

बिपिन रावत से जुड़ा एक किस्सा सबको याद है जब उन्होंने 2016 में भारतीय सेना के जरिए पाकिस्तानी आतंकवादियों के कई ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। बता दे कि पाकिस्तानी आतंकवादी भारतीय सरजमीं पर अनेकों शिविर बनाकर रह रहे थे। ऐसे में जब बिपिन रावत उप सेना प्रमुख बने थे तो मात्र महीने भर के अंदर ही उन्होंने इस स्ट्राइक को अंजाम दिया था।

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